महान गणितज्ञ रामानुजन का संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियां, सतत भिन्न, विभाजन फलन तथा प्रसिद्ध ‘रामानुजन संख्या’ का महत्वपूर्ण अवदान रहा- डॉ. कुमावत
लाडनूँ, 22 दिसम्बर 2025। संस्थान के शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय गणित दिवस पर 22 दिसम्बर को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. देवीलाल कुमावत ने रामानुजन के गणित के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियां, सतत भिन्न, विभाजन फलन तथा प्रसिद्ध ‘रामानुजन संख्या’ 1729 जैसी अवधारणाओं में महत्वपूर्ण कार्य किया। 1729 को रामानुजन संख्या कहा जाता है, क्योंकि यह दो अलग-अलग तरीकों से दो संख्याओं के घनों के योग के रूप में व्यक्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के ईरोड नगर में हुआ था। भारत सरकार द्वारा 22 दिसंबर 2012 को रामानुजन की 125वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय गणित दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा मद्रास विश्वविद्यालय चेन्नई में की गई थी।
हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहती है गणित
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. जैन ने बताया कि गणित हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी है। गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं, बल्कि यह तर्क, विश्लेषण, अनुशासन और समस्या-समाधान की कला है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अर्थशास्त्र और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित हर क्षेत्र में गणित की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में डाटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की आधारशिला गणित ही है। इसलिए विद्यार्थियों को गणित को केवल परीक्षा का विषय न मानकर अपने भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम बनाना चाहिए। कार्यक्रम में बी.एड. प्रथम वर्ष की छात्रा प्रीति ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में डॉ. गिरधारी शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के सभी संकाय सदस्य एवं छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बी.एड. प्रथम वर्ष की छात्रा अनोखा ने किया।



