आएसडी प्रो. अशोक जैतावत प्रस्तुत करेंगे शोध-पत्र,
लाडनूँ, 07 अगस्त 2026। जापान के क्योटो विश्वविद्यालय में हैम्बर्ग विश्वविद्यालय के सहयोग से 26 अगस्त से 2 सितम्बर तक आयोज्य ‘अहिंसाः जैन अध्ययन और उससे आगे (Ahimsa: Non-Violence & Jain Studies and Beyond)’विषय पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के लिए लाडनूं के जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति के ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी) प्रो. अशोक जैतावत जापान जाएंगे। वे यहां से 18 अगस्त को जापान के लिए फ्लाइट से रवाना होंगे। इस अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों के प्रख्यात् विद्वान जैन दर्शन की शाश्वत प्रासंगिकता तथा अहिंसा के सार्वभौमिक महत्व पर विचार-विमर्श करेंगे। विशेषाधिकारी प्रो. अशोक जैतावत इस संगोष्ठी में ‘जैन उपवास एवं ऑटोफैजीः तपस्या परंपराओं और आधुनिक जैव-चिकित्सा विज्ञान के मध्य एक अंतर-सांस्कृतिक संवाद’ विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे। जिसमें वे जैन धर्म की प्राचीन उपवास परंपरा और आधुनिक जैव-चिकित्सा अनुसंधान के बीच संबंधों का विश्लेषण करेंगे तथा बताएंगे कि किस प्रकार जैन परंपराएं आज भी आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी विमर्श को प्रेरित कर रही हैं।
जैविभा विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान में एक कदम और
संगोष्ठी में क्योटो विश्वविद्यालय, हैम्बर्ग विश्वविद्यालय, घंटे विश्वविद्यालय, टोक्यो विश्वविद्यालय, होक्काइडो विश्वविद्यालय, रयुकोकु विश्वविद्यालय सहित अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शिक्षण एवं शोध संस्थानों के विद्वान भाग लेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य धर्म, दर्शन, मानवशास्त्र, नैतिकता तथा प्राकृतिक विज्ञान जैसे विविध विषयों के माध्यम से अहिंसा के सिद्धांत का अंतर्विषयी दृष्टिकोण से अध्ययन एवं विश्लेषण करना है। जैन विश्वभारती संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान, प्रकाशन तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से जैन दर्शन की समृद्ध विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। प्रो. जैतावत को प्राप्त यह अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा जैन अध्ययन, अहिंसा और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में भारत के अग्रणी संस्थानों में जैविभा विश्वविद्यालय की विशिष्ट पहचान को और मजबूत बनाएगा। यह जैन दर्शन, अहिंसा, शांति अध्ययन तथा अंतर्विषयी अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। जैविभा विश्वविद्यालय परिवार ने प्रो. अशोक जैतावत को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता एवं शोध-पत्र प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि उनका यह योगदान विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को और सशक्त करेगा तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान में जैन दर्शन की स्थायी प्रासंगिकता को नई दिशा प्रदान करेगा।




