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मासिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत शांति की आवश्यकता पर व्याख्यान

मासिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत शांति की आवश्यकता पर व्याख्यान

दया और विनम्रता के भावों का अभ्यास वैश्विक व मानसिक शान्ति के लिए आवश्यक- प्रो. रेखा तिवाड़ी

लाडनूँ, 3 दिसम्बर 2022। जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में मासिक व्याख्यानमाला कार्यक्रम के अन्तर्गत ‘दी नीड फोर पीस’ (शांति की आवश्यकता) विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रेखा तिवाड़ी ने व्याख्यान प्रसतुत करते हुए कहा कि वैश्विक शान्ति एवं मानसिक उन्नति के लिए आज आन्तरिक शान्ति की महत्ती आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। विश्वशान्ति को पृथ्वी तक सीमित रखना संकुचित प्रवृत्ति मानते हुए उन्होंने अंतरिक्ष शान्ति को भी इसी अवधारणा में समाहित रखा और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति द्वारा मानवीयता, दयालुता, विनम्रता, परोपकार की भावना आत्मसात् किए जाने की और आवश्यकता बताते हुए कहा कि निरन्तर अभ्यास के द्वारा यह सब संभव है। उन्होंने महात्मा गाँधी, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, मदर टेरेसा, पाश्चात्य विचारक टीएस इलियट, आचार्य महाश्रमण आदि के विश्वशान्ति के सम्बंध में योगदानों को अहम बताया।

आन्तरिक शान्ति के बल पर विश्व शांति संभव

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान के पहले अनुशासता आचार्यश्री तुलसी के मनोभाव ‘सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से, राष्ट्र स्वयं सुधरेगा’ को आन्तरिक शांति एवं उसी आन्तरिक शान्ति के बल पर विश्व शांति की कल्पना की। उन्होंने विश्वशाति के लिए इतिहास से लेकर वर्तमान तक होने वाले सभी प्रयासों की सराहना करते हुए भगवान श्रीराम, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी आदि के योगदानों से लेकर समय-समय पर हुए युद्धों के उपरान्त संधियों, शान्ति-वार्ताओं व समझौतों के प्रयासों को शान्ति का नियामक माना। अंत में श्वेता खटेड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक चारण ने किया। इस दौरान डॉ. प्रगति भटनागर, डॉ. बलबीरसिंह, अभिषेक शर्मा, प्रगति चौरड़िया, प्रेयस सोनी, देशना चारण, तनिष्का शर्मा आदि मौजूद रहे।

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