लाडनूँ, 30 मार्च 2026। संस्थान के शिक्षा विभाग में भगवान महावीर जयंती का कार्यक्रम 30 मार्च को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने जैन धर्म को पुनर्गठित किया और समाज को अहिंसा और समता का एक नया मार्ग दिखाया। भगवान महावीर का विशिष्ट योगदान सत्य, अहिंसा और अनेकांतवाद जैसे सिद्धांतों के माध्यम से मानवीय चेतना का विस्तार करना रहा। भगवान महावीर ने पंच महाव्रत की शिक्षा प्रदान की, जिसका अनुपालन करने पर व्यक्ति श्रेष्ठ बन सकता है। जैन धर्म के सिद्धांत केवल व्यक्तिगत शांति के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए भी अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने घोषणा की थी कि मनुष्य अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। आज के संघर्षपूर्ण और उपभोक्तावादी युग में महावीर के सिद्धांत अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने एक भजन ‘ऐजी कुण्डलपुर के बीच अकेलो खेले महावीर’ भी गाया, जिससे सभी विद्यार्थी मन्त्रमुग्ध हो गये। डॉ. अमिता जैन ने भगवान महावीर की जीवन कथा एक राजकुमार के वर्धमान से महावीर बनने की आध्यात्मिक यात्रा से परिचय कराया। बी.एड छात्रा स्वाति ने कविता के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन परिचय से अवगत कराया। लीलावती ने महावीर के संदेशों पर प्रकाश डाला। मंच का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमिता जैन ने किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. देवीलाल कुमावत सहित सभी छात्राएं उपस्थित रहीं।




