लाडनूँ, 12 मार्च 2026। संस्थान के शिक्षा विभाग में संचालित व्याख्यानमाला के क्रम में कृत्रिम बुद्विमता के बारे में अपने व्याख्यान में डॉ. अमिता जैन ने कहा कि इस डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नई तकनीकों के कारण शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव आ रहे हैं। एआई के उपयोग से पढ़ाई अधिक सरल, रोचक और प्रभावी बनती जा रही है। स्कूलों, कॉलेजों और ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म पर एआई आधारित उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा में एआई के उपयोग के साथ जुड़ी चुनौतियों में सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी संसाधनों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं होने से सभी छात्रों को समान अवसर नहीं मिल पाता। साथ ही एआई पर अधिक निर्भरता से छात्रों की स्वयं सोचने और समस्या समाधान की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भविष्य में शिक्षा में एआई की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। इस अवसर पर ऑडियो और वीडियो का उपयोग करके विद्यार्थियों को एआई की जानकारी दी गयी। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उभर रहा है। इसका उपयोग सही नीतियों और संतुलन के साथ किया जाए, तो यह शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




