विवेक के साथ करें सोशल मीडिया का उपयोग- प्रो. व्यास
लाडनूँ, 14 जुलाई। जैन विश्व भारती संस्थान (डीम्ड विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के मार्गदर्शन तथा संरक्षण में आयोजित एक दिवसीय यूथ कैम्प फॉर ट्रेनिंग इन नॉन-वायलेंस विषयक प्रशिक्षण शिविर युवा, सोशल मीडिया और जीवन मूल्य विषय पर सम्पन्न हुआ। शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. के. एन. व्यास (जोधपुर) ने कहा कि आज का युवा अपार संभावनाओं का धनी है। यदि वह सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक संवाद के लिए करे, तो वह स्वयं के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा ही युवाओं को सही दिशा प्रदान करती है। शिविर में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं युवाओं ने भाग लेकर जीवन मूल्यों, डिजिटल अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली तथा अहिंसा के विविध आयामों पर विशेषज्ञों के विचार सुने। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु वंदना से हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो वंदना कुंडलिया ने स्वागत वक्तव्य दिया तथा डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ ने विषय परवर्तन प्रस्तुत किया। आभार ज्ञापन डॉक्टर बलबीर सिंह द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. लिपि जैन ने किया।
सकारात्मक उपयोग हो डिजीटल मीडिया का
शिविर के दूसरे चरण में डॉ. लिपि जैन ने डिजिटल युग में युवा, सोशल मीडिया और जीवन मूल्य विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि सोशल मीडिया स्वयं में न अच्छा है और न बुरा, उसका प्रभाव उसके उपयोग पर निर्भर करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सकारात्मक विचारों, ज्ञानार्जन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए करें तथा भ्रामक सूचनाओं और अनावश्यक विवादों से बचें।
स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
कार्यक्रम के अगले सत्र में प्रो. युवराज सिंह खंगारोत ने स्वस्थ जीवनशैली: आज से शुरुआत करें विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद तथा सकारात्मक सोच को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। साथ ही योग विभिन्न आसन भी करवाई और परीक्षा ध्यान के माध्यम से शांतचित रहने के तरीके बताए। शिविर के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर ने उन्हें जीवन मूल्यों, अहिंसा, आत्मानुशासन तथा सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग के प्रति नई दृष्टि प्रदान की। संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। अंत में आभार ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर युवाओं के व्यक्तित्व विकास, नैतिक चेतना और मूल्यपरक जीवन निर्माण की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। इस कार्यक्रम ने युवाओं को सकारात्मक जीवन दृष्टि, आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का सार्थक संदेश दिया।




