JVBI
JVBI Assistant
Online • Reply in 1 min
NAAC A Grade
ISO 9001:2015
34+ Years of Excellence
Apply Online
Call : 9461239683
Back to News
General

जैविभा विश्वविद्यालय के कार्मिकों व विद्यार्थियों ने किए अनुशास्ता के दर्शन

जैविभा विश्वविद्यालय के कार्मिकों व विद्यार्थियों ने किए अनुशास्ता के दर्शन

जीवन में अच्छी चेतना के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश जरूरी- आचार्यश्री महाश्रमण

लाडनूँ, 2 अगस्त 2022। आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा है कि शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी है। शिक्षक ज्ञान का आदान-प्रदान करता है, उसमें संस्कारों का समावेश होने पर उनका मूल्य बढ जाता है। जीवन में शिक्षा का महत्व है और संस्कार भी उसके महत्व को बढा देते हैं। जीवन में संस्कार अच्छे होने पर चेतना भी अच्छी रहती है। वे जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के कार्मिकों व विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के नाम में जैन जुड़ा है, जो वीतरागता का सूचक है। यह धर्म व दर्शन से जुड़ा हुआ शब्द है। इस विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ अध्यात्म के विकास भी किया जाना चाहिए, ताकि जैन नाम की सार्थकता हो। उन्होंने विकास के लिए एकाग्रता व परिश्रम के महत्व को भी बताया। विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण छापर में चातुर्मास प्रवास कर रहे हैं, उनके दर्शनार्थ एवं उनसे पाथेय प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के सभी स्टाफ एवं छात्राएं छापर पहुंची थी।

जैन व बौद्ध संस्कृतियों का परस्पर आदान-प्रदान जरूरी

पूर्व कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण को विश्वविद्यालय की प्रगति की जानकारी दी और भावी कार्यक्रमों के बारे में बताया। प्रो. दूगउत्र ने बताया कि विश्वविद्यालय के तत्वावधान में शीघ्र ही जैन व बौद्ध धर्म के उपदेशकों व शिक्षकों का एक सम्मेलन रखा जाएगा, ताकि दोनों संस्कृतियों का परस्पर आदान-प्रदान संभव हो सके। इसके अलावा राजस्थान की लोक-संस्कृति का एक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की एक कांफ्रेंस शीघ्र ही आयोजित करने की जानकारी भी दी। इनके अलावा प्रो. दूगड़ ने कार्मिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं एवं जैनविद्या, प्राकृत व संस्कृत के सम्बंध में योजनाओं के संचालन के बारे में बताया। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने भी संस्थान की गतिविधियों के बारे में बताते हुए प्रत्येक मंगलवार को दर्शनार्थ छापर आने के कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने सबके द्वारा प्रतिदिन काम या अध्ययन-अध्यापन शुरू होने से पूर्व नियमित रूप से प्रार्थना व ध्यान करने के बारे में भी बताया। इस अवसर पर कुलसचिव रमेश कुमार मेहता, विताधिकारी राकेश कुमार जैन, प्रो. नलिन के. शास्त्री, प्रो. बीएल जैन, डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डॉ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. प्रगति भटनागर, डॉ. विनोद कस्वा, प्रगति चौरड़िया, डॉ. आयुषी शर्मा, डॉ. जेपी सिंह, पंकज भटनागर, दीपाराम खोजा आदि उपस्थित रहे।

Share:
Latest News