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जैन विश्वभारती संस्थान में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रोताओं को कुरेदा, गुदगुदाया, वीर रस और भक्तिरस से किया ओतप्रोत

जैन विश्वभारती संस्थान में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रोताओं को कुरेदा, गुदगुदाया, वीर रस और भक्तिरस से किया ओतप्रोत

‘जिसको मेरी चाह नहीं, उसकी मुझको भी परवाह नहीं’

लाडनूँ, 15 जुलाई 2025। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय स्थित आचार्य महाश्रमण आॅडिटोरियम में तपस्वी मुनिश्री जयकुमार व मुनिश्री मुदित कुमार के सान्निध्य में आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवियों ने काव्य के विभिन्न रसों का रसास्वादन श्रोताओं को करवाया। कवि नरेश शांडिल्य दिल्ली की अध्यक्षता में हुए इस कवि सम्मेलन में मुनिश्री जयकुमार ने कहा कि जिस हृदय में संवेदना होती है, वहीं कविता लिखी जा सकती है। उन्होंने अपने स्वरचित कविता व गीत भी प्रस्तुत किए। मुनि जयकुमार ने ‘जिसको मेरी चाह नहीं, उसकी मुझको भी परवाह नहीं’ कविता सुनाई तो पूरा आॅडिटोरियत वाह-वाह से गूंज उठा। इसी तरह से उनका गीत ‘मां से बढकर इस दुनिया में होता कौन, मां तो होती है वरदान’ सुनाया तो सभी श्रोतागण भावविभोर हो गए। मुनि मुदित कुमार ने इस अवसर पर आचार्य महाप्रज्ञ की कविता प्रस्तुत की। अध्यक्षता करते हुए कवि नरेश शांडिल्य ने अपने मार्मिक दोहों की प्रस्तुति दी। उन्होंने जब कहा, ‘छोटा हूं तो क्या हुआ, जैसे आंसू एक। सागर जैसा खारा है, चख कर तो देख।’ इस पर सभी ने दाद दी। डाॅ. अशोक बत्रा ने भगवान महावीर व आचार्य श्री महाश्रमण पर कविताएं पेश की। उन्होंने कहा, ‘जिसने कोई युद्ध न छेड़ा, न पास कोई जंगी बेड़ा। न चलाया कभी भी तीर, वो भगवान महावीर।’ तो लोगों ने उन्हें खूब सराहा। डाॅ. सुरेन्द्र जैन ने जैन विश्व भारती पर अपनी कविता पढी।

बेटे अगर चिराग हैं तो बाती है बेटियां

कवि कमांडो समोद सिंह ने देशभक्ति व वीर रस की कविताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा, ‘दो दिन की कहानी रहे ना रहे, आशिकी में रवानी रहे ना रहे। देश के नाम पर इसे आज ही, क्या पता कल जवानी रहे ना रहे।’ इसके अलावा उन्होंने सुनाया, ‘नाम हमेशा लिखवाना देश बचाने वालों में, आओ मिलकर आग लगा दें आग लगाने वालों में।’ इस पर जबरदस्त तालियों से पूरा हाॅल गूंज उठा। कवि राजेश विद्रोही ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘बेटियां’ और लाडनूं पर कविताएं सुनाई। उनकी पंक्तियां ‘बाबुल की बेशकीमती थाती है बेटियां, बेटे अगर चिराग हैं तो बाती है बेटियां।’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसी प्रकार ‘इल्मो-अदब की आंख का तारा है लाडनूं। की भी खूब प्रशंसा की गई। इसी प्रकार कवयित्री बलजीत कौर ने भी ‘फूलों की खिलखिलाती है बेटियां, चिड़ियों सी चहचहाती है बेटियां।’ सुनाकर शाबासी बटोरी। संदीप सजल ने अपनी कविता में कुर्सी पर कटाक्ष कसे। उन्होंने कहा, ‘वक्त पर आकर ना संभाली कुर्सी, तो पता नहीं चले किसने उड़ाली कुर्सी।’ इसके अलावा उन्होंने आचार्य भिक्षु की 300वीं जयंती के अवसर पर भी श्रद्धांजलि-भावांजलि कविता प्रस्तुत की और ‘उभर रहा है चेहरा अखंड भारत का’ सुनाकर लोगों में देशभक्ति की भावना भर दी। कवयित्री सरिता जैन ने भी बेटियों पर अपनी रचना सुनाई। उन्होंने कहा, ‘भाग्य को सौभाग्य बनाती है बेटियां, हर दिन नया इतिहास बनाती है बेटियां’। जैन ने गांवों और कच्चे घरों का खाका भी अपनी रचनाओं में खींचा। उन्होंने कहा, ‘सुख में, दुःख में, सारे इकट्ठे होते हैं। कच्चे घरों में रिश्ते पक्के होते हैं। साथ ही कहा, ‘शबरी के हाथों से खाते हैं भगवान, झूठे बेर भी कितने मीठे होते हैं।’ इन्हें सभी ने मुक्तकंठ से सराहा।

झूठ के सभी कपाट खोलती है कविता

कवि मनोज गुर्जर ने हास्य रंग में सबको सराबोर कर दिया। गुर्जर ने आज की विकृत स्थितियों पर कसकर कटाक्ष किए। उन्होंने ‘छोरे पतियां खेलने में मस्त हैं, छोरियां इंस्टाग्राम पर फोेलोअर बढा रही हैं।’ सुनाकर समय को व्यर्थ के कामों में गंवाने को अनुचित ठहराया। करण सिंह जैन ने भी ‘बेटियों को भगवान का सर्वोत्तम उपहार बताते हुए कविता प्रस्तुत की। साथ ही उन्होंने वर्तमान राजनीति के खोखलेपन को भी अपनी रचना में उभारा। करण सिंह ने कहा, चारों और झंडों और पोस्टरों की भरमार है। भाषणों में गालियों की भरमार है।’ साथ ही ‘भारत से भ्रष्टाचार कभी नहीं जाएगा।’ सुनाकर तालियां बजवाई। कमलेश जैन ने आचार्यश्री महाश्रमण पर अपनी कविता में कहा, ‘वर्तमान के वर्धमान, महकी तुलसी की क्यारी’ और ‘गुरू महाप्रज्ञ के महानंदन महाश्रमण की जय‘। इन कविताओं को भी खूब सराहा गया। कवयित्री डा. मधु मोहिनी उपाध्याय ने ‘झूठ के सभी कपाट खोलती है कविता, सत्य को तराजू में तोलती है कविता’ सुनाकर काव्य की महता बताई। डा. राहुल अवस्थी ने ‘बातें अक्सर बात बनाया करती है, बाते अक्सर राह दिखाया करती है’ और ‘चोट हथौड़े की न पड़े जब तक, पत्थर पत्थर है भगवान नहीं होता’ सुनाकर अलग-अलग भावों को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने ‘मानो तो श्रीराम समूचा भारत है’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।

इन सबकी रही उपस्थिति

कवि सम्मेलन का प्रारम्भ स्वदेश अरोड़ा ने सरस्वती वंदना से किया। अंत में आभार ज्ञापन डा. युवराज सिंह खंगारोत ने किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश जैन ने किया। सम्मेलन में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, मंत्री सलिल लोढा, इन्द्र बैद, जैविभा विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजेश मौजा, उप कुलसचिव अभिनव सक्सेना, वित्ताधिकारी आरके जैन, राजेश चेतन, रूपसिंह राठौड़, राजकुमार चैरड़िया, दीपा सैनी, डाॅ. रसिक गुप्ता, केशरदेव मारवाड़ी, डाॅ. आदित्य जैन, प्रियंका राय, योगेन्द्र शर्मा, डाॅ. रूचि चतुर्वेदी, सोनल जैन, सपना सोनी, हरीश हिन्दुस्तानी, प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बीएल जैन, डाॅ. प्रगति भटनागर, पंकज भटनागर, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. लिपि जैन, दीपाराम खोजा, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. विष्णु कुमार, मनीष सोनी, दीपक माथुर, स्नेहा शर्मा, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. जेपी सिंह, डाॅ. जगदीश यायावर, निरंजन सिंह सांखला, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी, पवन सैन, ओमप्रकाश सारण, देशना चारण आदि उपस्थित रहे।

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