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बदले जाएंगे विश्वविद्यालयों के सभी पाठ्यक्रम, जैन विश्वभारती संस्थान में बैठक का आयोजन

बदले जाएंगे विश्वविद्यालयों के सभी पाठ्यक्रम, जैन विश्वभारती संस्थान में बैठक का आयोजन

अब पढाई के लिए भी बनेगा क्रेडिट बैंक, जिसमें जमा होंगे विद्यार्थियों के पढाई के आंकड़े

यूजीसी की नई व्यवस्था में अंतराल के बावजूद भी जुड़ेगी विद्यार्थी के पिछले अध्ययन की क्रेडिट

लाडनूँ, 17 अगस्त 2021।अब किसी भी शिक्षण संस्थान में अपनी पढाई अधूरी छोड़ कर गए विद्यार्थी को देश में कहीं भी और किसी भी विश्वविद्यालय में पुनः प्रवेश लेकर अपनी छोड़ी हुई पढाई को उससे आगे फिर से शुरू किया जा सकता है। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने समस्त विभागों एवं आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ के साथ बैठक लेकर बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब एक एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की स्थापना की जाएगी, जिसमें समस्त शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढाई की क्रेडिट के पॉइंट्स के रूप में जमा रहेंगे। इससे किसी विद्यार्थी के किन्हीं भी कारणों से अपनी पढाई में अंतराल आने के बावजूद उसके द्वारा पूर्व में की गई पढाई को बैंक क्रेडिट के आधार पर सम्मिलित करते हुए उससे आगे की पढाई की जाकर अपनी डिग्री प्राप्त की जा सकेगी। प्रो. दूगड़ ने बताया कि विद्यार्थी की यह क्रेडिट सात वर्षों तक बैंक में जमा रखी जाएगी और उसके पश्चात् उसे लेप्स कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था आगामी शिक्षण सत्र से प्रारम्भ की जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार अंडर ग्रेजुएट कोर्स में 1 वर्ष करने पर उसे सर्टिफिकेट और 2 वर्ष पूर्ण करने पर डिप्लोमा तथा 3 वर्ष पूर्ण करने पर डिग्री दी जाएगी। साथ ही 4 वर्ष का अध्ययन पूरा कर लेने पर उसे ग्रजुएशन ऑनर्स या रिसर्च की डिग्री मिलेगी। इसी प्रकार पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एक साल में डिप्लोमा और दो साल पूर्ण करने पर डिग्री प्रदान की जाएगी। 4 साल का ग्रेजुएशन ऑनर्स या रिसर्च करने वाला विद्यार्थी एक वर्ष में एम.ए. कर सकेगा। इस नई शिक्षण व्यवस्था से शिक्षा में लचीलापन आएगा तथा बीच में पढाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को पूरा लाभ मिल पाएगा।

बदले जाएंगे समस्त पाठ्यक्रम

कुलपति प्रो. दूगड़ ने बताया कि यूजीसी के निर्देशानुसार इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए समस्त कोर्सेज को मोडिफाई किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑनलाईन अध्ययन के प्लेटफार्म ‘स्वयं’ और ‘मूक्स’ के पाठ्यक्रमों को भी इस व्यवस्था में विश्वविद्यालय को स्वीकार करना होगा। इसके लिए 40 प्रतिशत तक ‘स्वयं’ या ‘मूक्स’ के पाठ्यक्रम को समाहित करते हुए और 60 प्रतिशत तक विश्वविद्यालय के अपने पाठ्यक्रम स्वीकार्य होंगे। स्वयं व मूक्स आधारित कोर्सेज अंडर ग्रेजुएअ के 83 और पोस्ट ग्रेजुएट के 40 कोर्सेज हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संशोधित किए जाने वाले पाठ्यक्रमों को एकेडमिक कौंसिल और बोर्ड ऑफ स्टडीज के द्वारा एप्रूवल किए जाने के बाद ही लागू किए जाएंगे। कुलपति ने इस सम्बंध में सभी संकायों के विभागाध्यक्षों से विस्तृत चर्चा भी की और उन्हें समस्त नवीन प्रावधानों के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने यूजीसी निर्देशों के अनुसार विभिन्न विषयों पर ‘शॉर्ट टर्म कोर्सेज’ के बारे में भी जानकारी दी। बैठक में कुलपति के अलावा प्रो. नलिन शास्त्री, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी, प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर शास्त्री, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल धर, योग व जीवन विज्ञान विभाग के डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डॉ. सत्यनारायण भारद्वाज, डॉ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. विनोद कुमार सैनी, डॉ. युवराज सिंह खांगारोत, प्रगति चौरड़िया, सुनील त्यागी, डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. आभासिंह, डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. प्रगति भटनागर, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. अशोक भास्कर, डॉ. गिरीराज भोजक, अभिषेक चारण आदि उपस्थित थे।

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